hdmavani


क़ुर्बानियों का जाम है छब्बीस जनवरी,
तुझको मेरा सलाम है छब्बीस जनवरी,

ये पर्व किसी धर्म या जाति का नहीं है ,
यारों,ये जश्न-ए-आम है छब्बीस जनवरी,

जिसने वतन के वास्ते सब कुछ लुटा दिया , 
उसका हमें इनआम है छब्बीस जनवरी,

आतंक रहित देश में अम्न-ओ-अमाँ रहे ,
देती हमें पैग़ाम है छब्बीस जनवरी,

होली,दीवाली,ईद है दिल को बहुत अज़ीज़ ,
तेरा बड़ा मुकाम है छब्बीस जनवरी,

लहराता रहे प्यारा तिरंगा ये हमारा ,
कहता ये खास-ओ-आम है छब्बीस जनवरी...

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